AIMIM टिकट मामला: सैयद इम्तियाज़ जलील की दो टूक सफ़ाई, आरोपों को बताया निराधार; नाराज़ कार्यकर्ताओं को संवाद का प्रस्ताव, मतभेद समाप्त करने की अपील

औरंगाबाद: (काविश-ए-जमील न्यूज़) :महानगरपालिका चुनाव 2026 से पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) में टिकट वितरण को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद सैयद इम्तियाज़ जलील ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी सफ़ाई पेश की है। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि टिकटों का वितरण किसी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत फैसला नहीं होता, बल्कि यह पार्टी की सामूहिक रणनीति और संगठनात्मक परामर्श का परिणाम होता है।
सैयद इम्तियाज़ जलील ने कहा कि AIMIM में उम्मीदवारों के चयन के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें वार्ड स्तर पर कार्य-क्षमता, जनस्वीकृति और चुनावी संभावनाओं जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट वितरण में किसी भी प्रकार की खरीद-फरोख्त या पारदर्शिता की कमी का सवाल ही नहीं उठता।
नाराज़ कार्यकर्ताओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पार्टी में मतभेद कोई नई बात नहीं है और हर बड़े चुनाव से पहले इस तरह की स्थितियाँ सामने आती रही हैं। हालांकि AIMIM एक संगठित और लोकतांत्रिक पार्टी है, जहाँ प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी बात रखने का अधिकार है। उनका कहना था कि कुछ लोग भावनाओं में आकर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व सभी मुद्दों को धैर्य और गंभीरता से देख रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो कार्यकर्ता या उम्मीदवार नाराज़ हैं, उनके लिए पार्टी के दरवाज़े बंद नहीं हैं और बातचीत के ज़रिये समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। सैयद इम्तियाज़ जलील ने उम्मीद जताई कि जल्द ही हालात बेहतर होंगे और सभी कार्यकर्ता पार्टी हित में एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेंगे।
उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि पुराने और वफ़ादार कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। उनके अनुसार पार्टी ने हमेशा संगठन के लिए काम करने वालों को प्राथमिकता दी है, लेकिन चुनावी रणनीति के तहत कभी-कभी कठिन फैसले भी लेने पड़ते हैं।
गौरतलब है कि AIMIM में टिकटों को लेकर हुए तीखे मतभेद, विरोध प्रदर्शन और निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के बाद सैयद इम्तियाज़ जलील की यह सफ़ाई राजनीतिक रूप से काफ़ी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि इसके बावजूद पार्टी के एक वर्ग में बेचैनी बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इन मतभेदों पर किस हद तक काबू पा पाता है।



